बीती बातों को जाने दो,
जो बीत गया, उसे जाने दो,
कल की धुंध में क्यों खोना है—
आज को अपना बनाने दो।
जीवन सुख-दुःख का मेला है,
कभी धूप है, कभी अँधेरा है,
सुख की बेला मुस्काती है,
दुःख भी जीवन का हिस्सा है।
जब खुशियाँ दामन भर जाएँ,
ग़म से क्यों फिर आँख चुराएँ?
धूप मिले तो छाँव भी होगी,
रात ढले तो भोर भी होगी।
राह कठिन हो, पाँव थकें,
आँखों के सपने कम न हों,
आँधी आए, तूफ़ान उठे,
पर हौसले कभी कम न हों।
चलते जाना, चलते जाना,
मंज़िल से नज़र न हटाना,
ठोकर को भी सीख समझकर
हर मुश्किल को पार लगाना।
दुःख की रात भले लंबी हो,
उम्मीद की लौ बुझने न देना,
कितना भी गहरा हो अँधियारा,
मन में सूरज ढलने न देना।
सत्य को अपना पथ बनाना,
सत्कर्मों से जीवन सजाना,
मेहनत की हर बूँद से तुम
सपनों का संसार बनाना।
मंज़िल केवल दूर नहीं है,
बस कदमों में देर हुई है,
जिसने हिम्मत थामी रखी,
उसकी जीत सुनिश्चित हुई है।
तो बीते कल का बोझ उतारो,
नव आशाओं से मन सँवारो,
जो होना है, वह कल होगा—
आज को जी भरकर निखारो।
चलो कि राहें बुला रही हैं,
चलो कि मंज़िल पुकारती है,
जिसके हौसले ज़िंदा हों,
किस्मत भी राह सँवारती है।
सत्य रहे, सत्कर्म रहे,
मेहनत का विश्वास रहे,
जीवन में चाहे ग़म आएँ,
होंठों पर फिर भी आस रहे।
बीती बातों को जाने दो,
आज को अपना बनाने दो,
उम्मीदों के दीप जलाकर
जीवन को सफल बनाने दो।
क्यों डरना फिर जीवन से—
जब मन में विश्वास रहेगा?
हर अँधेरी रात के बाद
एक नया प्रकाश रहेगा।
और जब पीछे मुड़कर देखोगे,
राह तुम्हारी बोल उठेगी—
“तुम चलते रहे…
इसलिए मंज़िल तुम्हारी हुई।”
— सरिता पाठक
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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