न जाने कहां सिमट गया है बचपन का वो पुराना घर,
जहां कभी सजती थी किलकारियों का स्वर,
न जाने कैसे बिछड़ गया वो साया हमसे,
अब होता नहीं है सवेरा अब लगता नहीं अंधेरों से...।।
अब खेलते नहीं गुड्डे-गुड़ियों का खेल,
अब होता नहीं है नीम के पेड़ से मेल,
शहर की वादियों में वो सुकून कहां है,
वो कच्चे मकान के जैसा कोई दूजा कहां है...।।
बारिश के पानी में कागज की बहती नाव,
गुम हो गई है बचपन की ठंडी छाँव,
दीवारों पर कभी लिखी थी मैंने भी कोई कहानी,
छूट गया है बचपन अब आ गई है जवानी...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







