अपनी कमजोरियों को ही,हौसला बना लिया,
जितने जहां से दर्द मिले, सबको दवा बना लिया।
जिन्हें मेरी परछाई से ,डर हुआ करता था कभी,
वक्त ने मोड़ लिया,उन्हें ही, हमनवां बना लिया।
ताने,जो,तीर की तरह, सीने में चुभा करते , मेरे,
सुना, स्वीकार किया, और फलसफा बना लिया।
मेरे आसमान, मेरे बादल,पर, बूंद बूंद को तरसा,
चुप रहकर खुद को, औरों से, जुदा बना लिया।
नफरतों, कड़वाहटों ने ढंग से जीना सीखा दिया,
खामोशियों को ही अपना, मैंने खुदा बना लिया।
वक्त ने कभी साथ दिया, कभी खेल खेला,
हमने तो वक्त को ही, दिलरूबा बना लिया।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







