महाभारत||भार्गव ऋषि
के भार्गव बोले आओ नाथ मैं प्रतीक्षा में तिहारी हूं
ना युद्ध हुआ ना युद्ध किया मैं सदा तेरा आभारी हूं
तुम ज्येष्ठ हो तुम श्रेष्ठ हो ना बात तुम्हारी टाले कोई
ना पांडव जीते ना कौरव हरे ना घर में बैठी ममता रोई
हे नाथ मेरे ना चुप रहो कुछ तो बोलो कुछ भत्तारो
मेरा संदेह गहरा ना करो तुम शीघ्र करो ना कुछ विचारों
श्री कृष्ण
तो सुनो महात्मा बात खरी ना युद्ध किसी से टल पाया
युद्ध हुआ महायुद्ध हुआ ना योद्धा कोई बच पाया
विनाश हुआ विकराल हुआ सारी धरा श्मशान बनी||
ऐसा नरसंहार हुआ सर कट कट गिरे महाबली
सुर्ख लहू से धरा बनी लाखों सैनिक मरे गए
कोई यहां गिरा कोई वहा गिरा सारे एक द्वारे गए
गांधारी और धृतराष्ट्र पुत्र सभी वो प्यारे गए
केवल दस बाकी शेष बचे बाकी योद्धा मारे गए
कौन बचा और कौन मारा मैं ये भी साफ बता दूंगा
तुम चिंता अधिक ना करो मैं सारा भ्रम मिटा दूंगा
पांच पांडव अश्वत्थामा कृतवर्मा कृपाचार्य
नोवा सात्यकि और दसवां खड़ा मैं पास आर्य
ऋषि भार्गव
इतनी बात हरि की सुनकर भार्गव क्रोधित हो उठे
तुम्हारे होते नाश हुआ वो अपना आपा खो बैठे
इतना भीषण हुआ कुछ बचा न बाकी खोने को
ये हुआ ना अच्छा युद्ध रे केशव तेरी नीति नहीं बचाने को
किया पाप रे तूने हरजाई अवश्य मिलेगा दंड तुझे
तू पापी है अपराधी है,क्या हुआ है ज्यादा घमंड तुझे
तू ठहर समय कुछ पास मेरे मैं करता थोड़ा जाप अभी
भर कर चूल्हू जल का मैं देता तुझको श्राप अभी
श्री कृष्ण
ठहरो भार्गव श्राप ना दो,ना अनर्थ करो,सुनो बात मेरी
प्रयास तो मैने अधिक किया ये युद्ध टले,बने भाई ना बैरी
परंतु होनी होती होने को मैं कैसे उसको रोकता
विधान विधि का बदलूं कैसे ये उलंघन किस पर थोपता
ऋषि भार्गव
मेरे श्राप से डरकर बात बनाते बातों में आना ना मुझे
तू छलिया बालक विख्याती मैं अवश्य दूंगा श्राप तुझे
श्री कृष्ण
ये बात नहीं है महात्मा ना इसमें तेरी भलाई है
आप यशस्वी ह तेजस्वी ह ब्रह्मचारीय के अनुयायि है
आशीर्वाद लिया है गुरुओं से,की सेवा तुमने गुरुओं की
तपोबल प्राप्त किया तप से भस्म बनाई असुरों की
श्राप देकर मुझको तुम ना अपनी विद्या नष्ट करो
हो जाएगा शून्य तपोबल ना खुद पर इतना कष्ट करो
ऋषि भार्गव
ना तपोबल मेरा कम होगा ना मैने किसी का हित किया
ना होगी विद्या समाप्त मेरी ना मैने किसी का अनिष्ट किया
श्री कृष्ण
मैं देख रहा हूं एक महा ज्ञानी खड़ा द्वारे अहंकार
अध्यात्म तत्व छोड़कर भूल रहा है संस्कार
भार्गव
अध्यात्म की बातों में मुझको ना उलझाओ केशव
तेरी बातों में ना बहकूँ मैं तेरा षडयंत्र अनोखा है ये सब
श्री कृष्ण
कर रहा हूं प्रयास, मैं केवल तुम्हे समझने को
मुझको तुम पहचानो ऋषिवर मैं आया तुम्हे बताने को
मैं श्राप ताप से ऊपर हूं ना मुझ पर इसका कोई असर
काल जाल भी मुझ में है मुझ में विलीन है सारी डगर
ऋषियों का मैं करता आदर स्त्रियों का सम्मान हूं
धर्मात्माओं का गौरव मैं राजाओं का अभिमान हूं
मेरे बिना सब सुन सुना मेरे बिना सब बेकार है
मैं ही इनको सत्य बनाता मेरा ही चमत्कार है
मैं ही न्याय करता मैं ही न्यायधीश हूं
मैं ही जगत का रखवाला मैं ही जगदीश हूं
ब्रह्म विष्णु महेश भी मैं, मैं ही ईश्वर हूं
त्रिलोकी में ना कुछ अछूता मैं ही परमेश्वर हूं
सब भूत प्रेत का मैं ही मालिक मैं ही प्रलय का कारण हूं
समस्त प्राणी मेरे अंदर मैं ही श्रृष्टि का लोकार्पण हूं
सत असत व्यत्त अव्यत क्षर अक्षर सब मेरे ही स्वरूप है
जहां भी घटना घटती है मेरे ही अनुरूप है
धर्म की स्थापना करने को मैं भिन भिन्न अवतरित होता
यदि युद्ध हुआ ना होता ऋषिवर अधर्म के अतिरिक्त कुछ
ना होता
मेरे जन्म का कारण युद्ध है ना उद्देश्य कोई दूजा था
ये युद्ध भयानक ना होता मेरा विषय ना पूरा हो पाता
मैं अपने अवतरित होने के बता दूं कारण तीन तुम्हे
साधुओं का उद्धार दुष्टों का संहार
स्थापना धर्म की करने को आता हूं मैं युगे युगे
था हो चला बलवान अधर्म भेष बनाकर कौरव का
पांडव रूपी धर्म शून्य ना किसी को उस पर गौरव था
मैने साथ दिया ना पांडव का मैं खड़ा धर्म के साथ था
हे मुनिराज तुम ही बताओ किया मैने गलत ये काज था
। भार्गव
क्षमा करो हे प्रभु मैं ना अब तक तुझको जान सका
मैं भक्त हूं तेरा कैसा माधव तेरी लीला ना पहचान सका
मुझे भटकी राह दिखाई माधव मेरा तोड़ा तूने अहंकार
उपकार किया है मुझ पर तूने मैं करता तुम्हे नमस्कार
जो अपमान किया है मैने तेरा मैं क्षमा याचना करता हूं
ये भूल हुई है भारी मुझसे मैं दया प्रार्थना करता हूं
नीटू मावी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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