हमसे जो थी, वो मुहब्बत की बात याद रखना,
तन–मन दोनों भीगे थे, वो बरसात याद रखना..।
माना कि अब तो है, सितारों में आशियाना तेरा..
जो मन–मुआफ़िक न थे, वो हालात याद रखना..।
अब मेरी फ़ुर्कत में नहीं बहते, ज़रा भी आंसू तेरे..
मगर कभी तो न संभले थे जज़्बात, याद रखना..।
कोई नश्तर से बना घाव, तो वक्त मिटा ही देगा..
जुबां ने दिया तो न मिटेगा, निशानात याद रखना..।
सिकन्दर भी ज़िंदगी का, ये फ़लसफ़ा देकर गया..
हज़ार शह के बाद मिलेगी, कोई मात याद रखना..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







