वो जब याद आती है,
मैं सोचता हूँ कि वो और याद आए,
कि उसका चेहरा भी देखने को मिले,
उसे याद करते हुए,
मैं उस याद के भीतर ही ,
उसके चेहरे की हल्की लकीरों पर,
मैं उसका चेहरा बनाता जाता हूँ,
मैं उसके चेहरे का चित्रकार हूँ,
हाँ तुम वो कागज मत ढूंढ लाना,
जहाँ मैंने कोई लखीटे खींचें थे,
वो बचपन की यादें हैं,
तुम उसे और मेरे महबूब को समान मत समझा करो,
बचपन प्रेम की बहादुरी है,
और ये प्रेम का व्यवहार है,
वहाँ के लिए इस लड़के को खींचकर,
इस व्यवहार में मत रखो,
वो बचपन मेरे इस प्रेम को भूला सकता है,
यहां खेल सकता है,
तो मेरे बचपन को मैं ही चैतन्य कर सकता हूँ,
और ये प्रेम अभी से मुझे व्यवहार करना सिखाता है,
इसमें हम पूर्ण होंगे,
थोड़ी देर तक वो याद रहती है,
फिर सपना,
फिर ख्वाब,
फिर चाहत,
और हकीकत में,
उसको दिल के पास पेश होना है,
मेरा दिल,
पहले ही धड़कन का है,
तो इसको प्रेम लगाना तभी,
जरूरी लगता है,
जब वो भी मुझे अपने दिल के सामने पेश करें,
बाकी प्रेम, सत्य की अग्नि का ताप है,
जो वास्तविक दुनिया को पसंद आता है,
पूर्ण सत्य कोई भी सहन नहीं कर सकता,
इसका असत्य के साथ विपरीत होना ही इसका संतुलन है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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