अपने जीवन की किताब का एक पन्ना फाड़ बच्चों में उमंग भरते सबके मात पिता।
वो कागज की नांव बनाकर कहानी सुनाते बच्चों को खुशियां बांटते मात पिता।
पतंग मंझे गुल्ली डंडा के संग ओलाद को आनंद देते रहते मात पिता।
दिवाली होली संक्रांति सब त्यौहार हर्ष उल्लास से मनाते रहते मात पिता।
उदास चेहरे पर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरते रहते मात पिता।
सपनों को हौसला की उड़ान देते जीवन में खुशियां भरते मात पिता।
अपने जीवन का एक एक पल बच्चों के सुख के लिए न्योछावर करते मात पिता।
बच्चों की खुशियों के लिए रोजाना जल्दी उठकर काम करने जाते मात पिता।
सत्यवीर वैष्णव बारां


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







