कब से कुँवारे हैं ये सितारे,
कब के कुँवारे हैं ये सितारे,
पलकों से भी दूर हैं ये सितारे,
चाँद ने भी खूब कहा था फिर भी ना माने,
दिल भी तो दूर है सितारों से भी दूर है,
दिल से भी दूर है मोहब्बत इनकी,
सितारों से परे दिल से भी पार है,
मोहब्बत तो सितारों से भी पार है,
इतनी दूर मोहब्बत का इंतजार रोशनी में होगा,
जब भी चमक जाएँ सितारें,
कि हमें मोहब्बत ने पुकारा,
कब के कुँवारे ये सितारे,
अंतरिक्ष में फैली है बारात इनकी,
दुल्हन ही तो है ब्रह्मांड इनकी,
जग भी कुँवारा है,
समय भी कुँवारा,
कुंडली तो इनकी कवि ही निकालेगा,
कब के कुँवारे हैं ये सितारे। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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