बार बार प्रणाम करें,
गुरु चरणों का सम्मान करें,
माँ की ममता जैसा प्रेम दिया है,
पिता जैसी छत्रछाया मिली है,
घर जैसा भोजन मिला है,
जीवन का इनसे आधार मिला है
आओ इनकी वंदना करें,
आओ अपना उद्धार करें,
कृतज्ञ होकर अपना उपकार करें,
बार बार प्रणाम करें,
कितनी मुश्किलों से निकलकर,
ये गुरु बने हैं,
कितने तप कितने ताने ये सहन किए हैं,
इनकी कहानी सुनकर तो,
शब्द भी रो दे,
सब्र भी अपना सब्र खो दे,
ऐसे पुण्य गुरुजनों का,
हृदय में स्वर्ण युग जैसा स्थान रखें,
स्वर्ग जैसा इनके लिए जहां रखें,
गुरु चरणों का सम्मान करें,
ये जीवन तो कम पड़ जाएँ,
इनका कर्ज चुकाने में,
पर अपने मन में,
इनका कीर्तन बार बार करें,
यही है जो दिशा दिखाए,
यही है जो राह बताएं,
यही जो गति बढ़ाए,
यही हमें भाषा छूना सिखाएँ,
यही कोमल वाणी का दीप जलाए,
आओ इनको दण्डवत प्रणाम करें,
प्रेमी गुरुजनों का मान रखें,
बार बार प्रणाम करें,
बार बार प्रणाम करें। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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