बूँदें जब बादल के रूप में
आसमान में होती हैं,
तब नहीं होती
उनकी कोई स्वतंत्र पहचान।
किन्तु एक साथ रहने के बाद
बूँदों में बढ़ता है आंतरिक विरोध
और वे एक-दूसरी बूँद के विरुद्ध
कर देती हैं विद्रोह।
परिणामतः , वे बूँदें
जो कि संगठित होकर
तैर रहीं थीं आसमान में
टूटकर गिरने लगती हैं
धरती की ओर।
धरती की ओर गिरते हुए
जब वायु का दाब
उन्हें सिकोड़ देता है,
तब याद आता है
उन्हें बूँदों का वह संगठन।
ज़मीन पर गिरती हुई बूँद
एक बार उछलती है
मानो वापिस जाना चाहती हो
बादलों के पास।
लेकिन वापिस लौटने में
असमर्थ होने के कारण
मिल जाती हैं पृथ्वी के उस जल से
जिस जल से विद्रोह करके
टूटी थीं आसमान में...


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







