ऐसा क्या लुट गया है,
जो पाने में,
अब तुम और तुम्हारी जिंदगी भी लुट
रही है,
और लूट रही खुद ही को,
खुद दिलासा देकर,
कि बहुत है पाने को,
अरे जबरदस्ती से आलीशान,
और अभाव रखना है क्या,
एक विराटता जब तक सूक्ष्मता,
फिर शून्यता नहीं होती,
तब वही बंटती है बिखरती है,
और शून्यता अदृश्य विराटता है,
और विराटता सब दृश्यों,
और कर्म सत रज तम की प्रकटता है,
अदृश्य शून्यता वो 'होना' है,
और दृश्य विराटता वो 'करना' है,
व्यवस्था संभालना प्रक्रिया गति उनका सम्पर्क सब अदृश्य शून्यता है,
क्योंकि अदृश्य शून्यता की गति तेज होने पर कारण ही ये 'होना' ही होना तभी संभव है,
बाकी दृश्य विराटता करती है,
वहां गति धीमी,
शुरुआत और अंत है,
कुछ नया है तो अदृश्य हैं,
और कुछ जिंदगी या प्रकट है तो वो दृश्य है,
संतुलन हमेशा अदृश्य में ही सफल है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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