मुझसे तेरा अस्तित्व, आधार भी,
सुन्दर तन स्वरूप मुझ जैसा ही।
कुसुम लताएं मचल रही निर्बाध,
नवल रूप नव आधार निर्मल ही।।१।।
तरु किसलय तो तुम उपवन में,
नव सुमन के इत्र बिखेर रहे हो।
मेरे गति की सुन्दर मति बनकर,
दीपक सम ज्योत बिखेर रहे हो।।२।।
प्रस्तुति अपनी प्रस्तुत करने में,
यश - सुयश की गाथा गढ़ते हो।
सज आए, हमें सजाने अविरल,
प्रेम परिधि पर पलकर बढ़ते हो।।३।।
स्वागत गान में उद्धत निरंतर मैं,
प्रतीक्षारत थी वेदना में तड़पकर।
असीम हृदय की हार ले खड़ी हूं,
आओ मुन्ना! निहार रही सजकर।।४।।
___ देवनन्दन कुमार, "बरहथिया"।
28/07/2026.


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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