शीर्षक
टूटा विश्वास
बदल गया वो दोस्त जो कई सालों से साथ था, न जाने उसने ये क्यू
किया, वह दोस्त जिसे मैने पहचान दिलाई पर उसने अपनी औकात अब दिखाई न जाने क्या हुआ, कहते हैं न की किसी की हैसियत से ज्यादा समय वैल्यू नही देना चाहिए , पर मैने समझा ये तो मेरा दोस्त हैं पर किसी के लिए हमेशा उपलब्ध रहना जरुरी नही हैं मै पर उसके लिए हमेशा उपलब्ध रहा था, किसी वस्तु का कीमत चुकाये या उसके लिये बिना संघर्ष किये बिना मिल जाने पर उसकी कद्र कोई नही करता फिर वह कोई वस्तु हो या कोई व्यक्ति या किसी का अमूल्य समय पर उससे मुझे यह उम्मीद नही थी वो ऐसे करेगा मे हमेशा उसे अपने से बेहतर बनाना चाहता था पर वह ठहरा दोगला मतलबी मैने उसके साथ चार से ज्यादा साल व्यतित किये, मैने उसकी सभी से पहचान करायी कि ये मेरा भाई हैं पर उसने गलत संगत मे जाना चाहा मैने कई बार hse समझाया की ये नशे मत कर भाई ये बीड़ी सिगरेट गुटका (राजश्री) मत खा पी पर वह बोला मे आगे से नही करूँगा हद तो तब हो गयी उसने मेरे मन करने के बाद भी नशा किया जब कोई अपना मना करने के बाद भी गलत काम करता हैं तो बुरा तो लगता हैं पर भरोशा भी टूट जाता हैं अब तो मैं उसका दुश्मन बन गया हूँ, मै भी उससे बोलना नही चाहता वो भी नही बोलता मैने उसे टोका ( गलत काम करने से रोका) इसलिए उसने बोलना बन्द कर दिया मुझसे। जो होता हैं अच्छे के लिए होता हैं ऐसे दोस्त (मित्र) को अपने साथ भी नही रखना चाहिए न ही ऐसे दोस्त के साथ रहना चाहिए।
धन्यवाद
🖊 लेखक:- देवराज मालवीय (devraj malviya)
कलम नाम :- (देव) (dev)


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