पर्दा-ए-राज़ ने किया रुस्वा, वरना उरियां थे हम तो अव्वल से।
ख़ाक का पुतला रह गया पीछे, जान छूटी है इस तग़ाफ़ुल से॥
हुस्न ओ क़ामत का क्या यहाँ रोना, ये तो ढलती हुई सी इक रुत है।
देख बचपन, शबाब और बुढ़ापा, सबक ले इस बदलते मौसम से॥
चोरी-छिपे देखने की थी जो हवस, आम होने से वो भी ख़त्म हुई।
आईना दोनों सम्त है रक्खा, कौन बचता यहाँ तअ़म्ल से॥
जो कमाता है दिन भर धूप में, घर में वो भी तो बे-ज़मीं ठहरा।
तंग आ कर ये मर्द रोता है, ज़माने के इस तश़द्दुद से॥
मिट्टी मिट्टी को देखती क्या है, रूह को रूह से मिला 'शायर'।
जिस्म का वहम मिट गया सारा, सच मिला जब हमें हक़ीक़त से॥
- ललित दाधीच
पर्दा-ए-राज़ (पर्दा-ए-राज़): रहस्य का पर्दा / छुपाव का पर्दा।
रुस्वा (रुस्वा): बदनाम / अपमानित।
उरियां (उरियाँ): नग्न / बिना कपड़ों के (जैसे इंसान पैदा होता है)।
अव्वल (अव्वल): शुरुआत से / आदि से।
तग़ाफ़ुल (तग़ाफ़ुल): लापरवाही / अनदेखी करना।
हुस्न ओ क़ामत (हुस्न ओ क़ामत): शारीरिक सौंदर्य और कद-काठी (शारीरिक बनावट या फिगर)।
शबाब (शबाब): जवानी / युवावस्था।
हवस (हवस): वासना / लालसा / तीव्र इच्छा।
सम्त (सम्त): तरफ / दिशा (दोनों सम्त = दोनों तरफ)।
तअ़म्ल (तअम्ल): संकोच / झिझक / सोच-विचार।
बे-ज़मीं (बे-ज़मीं): बिना ज़मीन का / जिसका अपना कोई ठिकाना न हो।
तश़द्दुद (तशद्दुद): ज़ुल्म / कठोर व्यवहार / मानसिक दबाव।
वहम (वहम): भ्रम / मुग़ालता (जो सच न हो)।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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