नहीं नहीं दिल अब नहीं,
नहीं नहीं दिल अब नहीं,
अब तो हामी तुम भी भर दो,
क्या लिखना था भूल गया,
तुम्हारी फिक्र में सिर रखना है,
अब तो साँसें तुम भी ले लो,
नहीं नहीं दिल अब नहीं,
अब तो हामी तुम भी भर दो,
इश्क़ तो काज़ी है,
जो गुमराही भरता है,
तुम इससे बातें कभी मत करना,
ये जान की कीमत लगाता है,
तुम बस दिल को राजी कर लो,
बाकी महफ़िल मैं बनता हूँ,
नहीं नहीं दिल अब नहीं,
अब तो हामी तुम भी भर दो।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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