ऐ हवाओं! मुझे मत छेड़ो
चल रहा हूँ, चलने दो!
मत रोको! मत घेरो!
गीत जो चली आ रही
तुम्हारी नमी में,
घुल घुलकर
मेरी सांसों को, छेड़ने दो!
इनकी दिशाएं मत फेरो!
इक तस्वीर सी बन जाती है
आंखों के सामने
धुंधली धुंधली क्षितिज पर
उड़ते बादलों के मध्य
किसी मतवाली नृत्यांगना की
जो, थिरकती है, तुम्हारी
सर सर गीतों की ताल में,
जब तक चलूँ पथ पर,
तुम भी मत रूको
मुझे भी मत रोको!
बस, ऐसा ही चित्र उकेरो!!
झूम रहें हैं उपवन - उपवन
नाच रहीं हैं झाड़ियाँ
नाग- नृत्य करती हैं
खेतों में धान की पत्तियाँ
बिछी हुई हरियाली झूले
भूमि सतह पर सोये -सोये
अमराई की डाली -डाली पर
कोयल भी है खोये -खोये
शीतल सुधा से नहा रहा मन
राह में गीतों की बूंदें बिखेरो!!
ऐ हवाओं! मत रोको! मत घेरो!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







