उसकी ख़ुदखुशी पे आखिर ये कैसा ज़ुल्म कर बैठे
लड़की मर गई हम आशिक़ का झूठा इल्म कर बैठे
हर ख़ुदखुशी के पीछे गली में उसका यार नहीं होता
दर्द के थैले इतने बढ़ गए ख़ुद क़ो लाइल्म कर बैठे
ज़ख्म देने में कुछ अपने भी थे सो सबर किया हमनें
ना चाहते हुए भी ख़ुद क़ो मुरव्वत-ए-हिल्म कर बैठे
क्या कहेंगे ख़ुद सें हम ज़ब मारे जायेंगे ख़ुद के हाथों
थोड़ा और सबर न किया रूह क़ो यूँ बे-इल्म कर बैठे
पूछूँगी उन माँ-बाप सें मौत शोक बेहतर हैं समाज सें
औलाद का ज़र्फ न देखा ख़ुद क़ो मुअल्लिम कर बैठे
ख़्वाब,मुहब्बत,मुस्तकबिल सब क़ुर्बान किया कृष्णा
तौहमते तब भी ख़त्म न हुई सो ख़ुद पे ज़ुल्म कर बैठे..
मुरव्वत-ए-हिल्म = सहनशीलता की मूरत


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







